स्याह कालिमा में जब आए न कुछ नज़र
रख सबर
अंधेरी बहुत ये रात है, पर आएगी सहर
रख सबर
लाचार जब महसूस हो, रख हौसला, न डर
रख सबर
बेबस अगर हालात हैं, बस में जो हो वो कर
रख सबर
तंत्र चरमरा चुके, हैं मद में चूर मातबर
रख सबर
जो हैं सशक्त ढूँढते आपदा में वो अवसर
रख सबर
उनकी न राह देख अब बन जा आत्मनिर्भर
रख सबर
हलकान होकर बैठ मत, तू धीरज धर
रख सबर
अकेला नहीं है तू कई हैं साथ, तू यक़ीन कर
रख सबर
कर सके मदद किसी मजबूर की तो कर
रख सबर
रस्ता जो न दिखे, रख आस्था भगवान पर
रख सबर
ईमान से गर ठान ले, पा जाएगा डगर
रख सबर
चरम अंधेरे बाद ही तो आती है सहर
रख सबर
उस चरम पर आज हम, कल आएगी सहर
रख सबर